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Monday, December 10, 2012

उमीदों का कारवां .............

उमीदों का कारवां है दुखों से भरा .......
राह है मुश्किल , मंजिल है काटों भरी ...
मगर तू चलता जा राही , अपनी डगर 
बिना मंजिल की फिकर  किये
मुसाफिर तुझे अपना लक्ष्य जरुर हासिल होगा ,
एक ना एक दिन .....

उमीदों का कारवां है दुखों से भरा .......
तू चलता जा राही तू चलता जा .....


"  प्रियंका  त्रिवेदी "

Tuesday, August 7, 2012

आज क्या लिखूं ...............

क्या लिखूं मैं आज ?????

आज मेरे शब्दों को ये क्या हो गया है ..
शब्द मिट गये हैं ,
रास्ता खो गया हैजो न सोचा था कभी ये वही हो गया है
आज मेरे शब्दों को ये क्या हो गया है ..


 नहीं  मिल रही  हैं शब्दों को आज उनकी मंजिल ,
 विव्हल हैं  ये  शब्द आज ऐसे
जैसे रो रहे हो 
जाने पे किसी के ...
कैसी लगी नज़र इनको ऐसी ..
टूट कर बिखर गये हों जैसे ,,,

आज मेरे शब्दों को ये क्या हो गया है ..मंजिलें भी नयी हैं
रास्ता
भी नया  है
आज मेरे शब्दों को ये क्या हो गया है ..???????
ये क्या खो गया है .....
ये क्या खो गया है??????


"प्रियंका त्रिवेदी"




POSTED ON 07-08-12 AT 11:37 P.M.

Friday, August 3, 2012

माँ ...............

"
काँटों पर चलकर जिसने फूलों का आशियाना सजाया ,
शोलों पर चलकर जिसने हमें अंगारों की तपन से बचाया ,
खुद को भूलकर जिसने हमें जीना सिखाया ,
बारिश में भीगकर जिसने हमें , धूप से छिपाया ,
वो कौन है ??????

वो माँ है , माँ है ....
हम सबकी दुलारी माँ हैं ..................

"प्रियंका त्रिवेदी
"

Monday, February 13, 2012

गहरे घाव ...

वक़्त के दिए गए घावों को मिटायें कैसे
और इन्हें दुनिया से छुपायें कैसे - छुपायें कैसे !!!!!!!!!!!!

- प्रियंका त्रिवेदी

Wednesday, February 8, 2012

जीवन का सार .......

ममता की छाव को कभी भुलाना नहीं
चाहें कुछ भी हो जाये उन्हें कभी रुलाना नहीं ..

पिता का विश्वास कभी तोडना नहीं
उनका साथ कभी छोड़ना नहीं ..

अपने गुरुजनों का दिल कभी दुखाना नहीं
और उनका आशीर्वाद लेना कभी भुलाना नहीं .

भगवन का नाम कभी मन से हटाना नहीं
और मेहनत का जज्बा कभी दिल से मिटाना नहीं ........

- प्रियंका त्रिवेदी

Thursday, January 12, 2012

जुदाई का लम्हा ................


जुदाई का पल  अक्सर एक लड़की लड़की के ही जीवन में आता है ,
हर बार उसे उसके माता - पिता से अलग कर दिया जाता है ,
जिसे 
उसके माता - पिता इतने लाड - प्यार के साथ बड़े ही ,
नाजों से पलते - पोसते हैं , उसकी हर  ख्वाहिश
को , उसकी हर चाहत को ,
और उसकी साड़ी छोटी - बड़ी इच्छाओं को पूरा करते हैं , उसको पढ़ाते हैं , लिखाते  हैं ,
उसे इस समाज में रहने के काबिल बनातें  हैं , उस पर अपना ढेर सारा प्यार लुटाते हैं ,
एक बेटी भी अपने माता - पिता से बहुत प्यार करती है , अपने घर से भी बहुत प्यार
करती है , अपने परिवार को वो इतना चाहती है की वो उनके बिना कभी भी नहीं रह सकती .........
बचपन से लेकर कई सालों तक वो अपने घ्जर में अपने माता - पिता , अपने भाई - बहनों ,
के साथ रहती है , कहलती- कूदती है , कितना ढेर सारा वक्त बिताती है , जब वो अपने ,
भाई - बहनों के साथ खेल - खेल में लडती - झगडती  है  तो उसके मम्मी - पापा हमेशा
उसे प्यार से या फिर डांटकर लड़ने से मना करते हैं , कभी - कभी वो डांट की वजह
से नाराज  भी हो जाती है , लेकिन फिर थोड़ी देर के बाद वो फिर से वैसे खेलने लगती है
ये सारी बातें एक बेटी अपने मम्मी - पापा के साथ  रहकर उनकी देख - रेख में करती है ,
उसको सारे अच्छे संस्कार उसके माता - पिता से मिलते हैं , उसके माता - पिता ही उसको हर
सही और गलत बात में अंतर करना सिखाते हैं , उसे हमेशा अच्छी सीख देते हैं , इतना सब
कुछ करने के बाद भी वही बेटी जब बड़ी होती है तो उसके माता - पिता जो उसे हर काबिल बनाते हैं ,
इतना ढेर सारा प्यार उस पर न्योछावर करते हैं , उसकी शादी करके किसी और के घर भेज देते हैं ,
ऐसे घर में जिसे वो कभी भी नही जानती है , जिस घर से उसका कोई भी सम्बन्ध नही होता ,
उस बेटी के माता - पिता को भी ये सब करते समय बहुत दुःख होता है , उनकी आँखों से भी आंसू
निकलते हैं , बेटी को भी बहुत दुःख होता है , वो अपने घर की हर चीज को बहुत याद करती है ,
जिसने इतने साल अपने प्यारे मम्मी - पापा के साथ बिताये   , जिसे उनसे इतना प्यार और ,
दुलार मिला , आज वही घर उसे छोड़ना पड़ता  है , तो उसे बहुत दुःख होता है ,

आखिर क्यों होता है ऐसा - की जब एक बेटी के माता - पिता को उसकी शादी करने पर
इतना दुःख होता है , तो फिर एक बेटी को उसके माता - पिता और उसके परिवार  से जुदा
क्यों किया जाता है - क्यों आखिर क्यों ???? ...................

" प्रियंका त्रिवेदी "

Monday, January 9, 2012

गजल ............



दिल के जख्मों को जुबान पे लायें कैसे ,
गम - ए - उल्फत  का दीदार कराएँ कैसे  ,
अपने दुखों को  दुनिया से छुपायें कैसे ,
अपने ग़मों से सबको बचाएं कैसे,
दिल के जख्मों को जुबान पे लायें कैसे ,!!
दिल में उठते हुए तूफ़ान को मिटायें कैसे .......
उजड़े हुए चमन में बहार लायें कैसे  .........
अपनी डूबती हुई कसती को पार लगायें कैसे ....
दिल के जख्मों को जुबान पे लायें कैसे , !!!
दिल में उमड़ते हुए सैलाब को रुकाएं कैसे ,
अपने
टूटे हुए मन को मनाएं कैसे .....
अपनी हस्ती को आफताब  बनाएं कैसे ??
दिल के जख्मों को जुबान पे लायें कैसे !!!!
लायें कैसे ????


"प्रियंका त्रिवेदी "


Sunday, January 8, 2012

निश्छल प्रेम ....................



हम जी रहे  हैं , अपनी इस ज़िन्दगी में ,
क्योंकि वो खुश हैं , हम खुश हैं क्योंकि वो मुस्कुरा रहे हैं ......
उनकी एक मुस्कराहट के लिए हम छोड़ दें ये दुनिया ,,
उनकी अपनेपन की छाव में हम बहुत आनंद उठा रहे हैं
कितना प्यार है , उनके मन में हमारे लिए ,
कितने इज्जत है , हमारे मन में उनके लिए ,,,,
कोई स्वार्थ नहीं उनके प्यार में , कोई छल नहीं उनके लिए हमारे प्यार में .....
उनकी जगह नहीं ले सकता कोई और हमारे दिल में .
हमारी जगह भी नहीं ले सकता कोई और उनके दिल में ....
हम बहुत सहज महसूस करते हैं अपने आपको उनके प्यार के साए में ....
कितनी उम्मीदें हैं उन्हें हमसे , हम भी नहीं करना चाहते मायूस उन्हें ..
उन्हें नहीं चाहते हम दुखी देखना , वो भी नहीं चाहते कभी हमें दुखी देखना ...
हमारी दिली तमन्ना है की वो सदा यूँ ही मुस्कुराते रहे ....
जो भी चाहें जीवन में पाते रहें , .......
और हम भी उन्हें खुश देखकर यूँ ही जिन दगी बिताते रहें ....
DEDICATED TO ALL MY IDEALS & WELL WISHERS IN MY LIFE .......

"प्रियंका त्रिवेदी "

Saturday, January 7, 2012

प्रकृति दर्शन ................



मैंने आज एक बहुत प्यारा सपना देखा  .......
मैंने देखा की मौसम बड़ा सुहाना था  ......चारों तरफ हरियाली ही हरियाली  थी .....
प्रकृति का नजारा बड़ा ही प्यारा और दिल को सुकून देने वाला था ,,,
कोयल के वो सुरीले गीत वो फूलों की प्यारी खुशबू वो हवाओं की सनसनाहट ,,
वो झरनों का बहना ,, वो भौरों का भुनभुनानना , ये सब मन को बहुत ही अच्छा लग रहा था ...
मुझे बड़ा आनंद आ रहा था ... मुझे ऐसा लग रहा था, मानो आज मुझे प्रकृति के साक्षात् दर्शन
हो गए हों !!!!!
बड़ा सुकून मिल रहा था की अचानक मेरी आँख खुल गयी , और तब मुझे अहसास हुआ ,
की नहीं ये सब कुछ भी सही नहीं था , बस मेरा एक सपना ही था .....
जो की अब टूट चुका था , मुझे कोई प्रकृति के कोई दर्शन नहीं हुए थे ...
वो सब बस मेरा एक भ्रम था ,, जो अब चूर - चूर होकर बिखर चुका था ........
ये सोचकर मुझे बहुत दुःख हुआ ... लेकिन मैंने हार नहीं मानी ,,,,,
और अपने उस सपने को सच करने के लिए प्रयास करती रही ....
ताकि कभी तो मेरा वो सपना पूरा हो सके !!!!!!!!!


"प्रियंका त्रिवेदी"

Wednesday, January 4, 2012

आज का सच ...........

उस प्यारी सी बच्ची को गाँव के बाहर कूड़े के ढेर में फेक दिया गया ,
 केवल इसीलिए क्योंकि वह अपने गरीब माता पिता के लिए चौथी
लड़की थी जो की उनके परिवार में पैदा हुई थी , ......

यहाँ तक की आज के आधुनिक युग में भी एक लड़की जन्म को सही तरीके से नही देखा जाता है .....

यहाँ भारत का लड़के और लड़कियों के जन्म का अनुपात १०० लडकों पर ९० लड़कियां है .......
जो की संसार के औसत अनुपात .... १०५ लड़कियों पर १०० लडकों के अनुपात से बेहद कम है .....

ये है आज के संसार का सबसे शर्मिंदा कर देने वाला सच .......  

अरे हमें तो अपने संसार से कुछ सीखना चाहिए , और लड़कियों को जीने का बराबर हक देना चाहिए .........
ताकि वे भी इस दुनिया का एक अभिन्न अंग बन सकें और ..... हमारे संसार को स्वर्ग बना सकें .....


मेरा इस कविता को लिखने का केवल एक और एकमात्र उद्देश्य यही है की ....
हर व्यक्ति कन्या भ्रूण हत्या के बारे में जागरूक बन सकें जोकि अपने भारत में बहुत ही
तेजी के साथ बढ़ रहा है , और अन्य देशो में भी इसको रोकने के कोई सार्थक प्रयास नही किये गये हैं ...........

मैं केवल यही चाहती हूँ की इस संसार में , हर लड़की के पास  , एक लड़के की तरह ही अपने जीवन को जीने के ,,
लिए समान अधिकार हों , ताकि वे भी इस दुनिया में रह सकें  ....... क्योंकि लड़कियां भी न केवल हमारे देश
का बल्कि इस संसार का एक बहुत ही महत्वपूर्ण अंग हैं ...... उनके पास भी  समान शक्तियां और
अधिकार होने चाहिए ताकि वे भी अपने जीवन आज़ादी के साथ जी सकें , और अपने आपको वे पुरे संसार में कामयाब
बना सकें .........
यहाँ तक की लड़कियों के पास ज्यादा छमताएँ और बुद्धि होती है ,, न केवल वे अपने जीवन को सफल बना सकती है ,
बल्कि वे अपने माता - पिता के सपनो, उनकी आशाओ को भी पूरा कर सकती हैं ,,,, और
अपने घर, अपने परिवार , अपने देश और इस पुरे संसार को अपनी नयी - नयी कामयाबियों से  गौरवान्वित भी
करती हैं .....


इसलिए कृपया करके उन्हें जीने दीजिये , उन्हें मत मारिये , और इन सारी बकवास चीजो को होने से रोकिये .......

अगर मेरी कविता , आपके दिलों में छोटी से भी जगह बना पायी होगी तो ,, मेरी और मेरी कविता के लिए एक बहुत बड़ी
उपलब्धि होगी , और मेरी इस कविता को लिखने का मतलब सार्थक हो जाएगा ............

                                               "धन्यवाद"


"प्रियंका त्रिवेदी"