जुदाई का पल अक्सर एक लड़की लड़की के ही जीवन में आता है , हर बार उसे उसके माता - पिता से अलग कर दिया जाता है , जिसे उसके माता - पिता इतने लाड - प्यार के साथ बड़े ही , नाजों से पलते - पोसते हैं , उसकी हर ख्वाहिश को , उसकी हर चाहत को , और उसकी साड़ी छोटी - बड़ी इच्छाओं को पूरा करते हैं , उसको पढ़ाते हैं , लिखाते हैं , उसे इस समाज में रहने के काबिल बनातें हैं , उस पर अपना ढेर सारा प्यार लुटाते हैं , एक बेटी भी अपने माता - पिता से बहुत प्यार करती है , अपने घर से भी बहुत प्यार करती है , अपने परिवार को वो इतना चाहती है की वो उनके बिना कभी भी नहीं रह सकती ......... बचपन से लेकर कई सालों तक वो अपने घ्जर में अपने माता - पिता , अपने भाई - बहनों , के साथ रहती है , कहलती- कूदती है , कितना ढेर सारा वक्त बिताती है , जब वो अपने , भाई - बहनों के साथ खेल - खेल में लडती - झगडती है तो उसके मम्मी - पापा हमेशा उसे प्यार से या फिर डांटकर लड़ने से मना करते हैं , कभी - कभी वो डांट की वजह से नाराज भी हो जाती है , लेकिन फिर थोड़ी देर के बाद वो फिर से वैसे...