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उमीदों का कारवां .............

उमीदों का कारवां है दुखों से भरा ....... राह है मुश्किल , मंजिल है काटों भरी ... मगर तू चलता जा राही , अपनी डगर  बिना मंजिल की फिकर  किये मुसाफिर तुझे अपना लक्ष्य जरुर हासिल होगा , एक ना एक दिन ..... उमीदों का कारवां है दुखों से भरा ....... तू चलता जा राही तू चलता जा ..... "  प्रियंका  त्रिवेदी "

आज क्या लिखूं ...............

क्या लिखूं मैं आज ????? आज मेरे शब्दों को ये क्या हो गया है .. शब्द मिट गये हैं , रास्ता खो गया है जो न सोचा था कभी ये वही हो गया है आज मेरे शब्दों को ये क्या हो गया है ..  नहीं  मिल रही  हैं शब्दों को आज उनकी मंजिल ,  विव्हल हैं  ये  शब्द आज ऐसे जैसे रो रहे हो  जाने पे किसी के ... कैसी लगी नज़र इनको ऐसी .. टूट कर बिखर गये हों जैसे ,,, आज मेरे शब्दों को ये क्या हो गया है .. मंजिलें भी नयी हैं रास्ता भी नया  है आज मेरे शब्दों को ये क्या हो गया है ..??????? ये क्या खो गया है ..... ये क्या खो गया है?????? "प्रियंका त्रिवेदी" POSTED ON 07-08-12 AT 11:37 P.M.

माँ ...............

" काँटों पर चलकर जिसने फूलों का आशियाना सजाया , शोलों पर चलकर जिसने हमें अंगारों की तपन से बचाया , खुद को भूलकर जिसने हमें जीना सिखाया , बारिश में भीगकर जिसने हमें , धूप से छिपाया , वो कौन है ?????? वो माँ है , माँ है .... हम सबकी दुलारी माँ हैं .................. "प्रियंका त्रिवेदी "

गहरे घाव ...

वक़्त के दिए गए घावों को मिटायें कैसे और इन्हें दुनिया से छुपायें कैसे - छुपायें कैसे !!!!!!!!!!!! - प्रियंका त्रिवेदी

जीवन का सार .......

ममता की छाव को कभी भुलाना नहीं चाहें कुछ भी हो जाये उन्हें कभी रुलाना नहीं .. पिता का विश्वास कभी तोडना नहीं उनका साथ कभी छोड़ना नहीं .. अपने गुरुजनों का दिल कभी दुखाना नहीं और उनका आशीर्वाद लेना कभी भुलाना नहीं . भगवन का नाम कभी मन से हटाना नहीं और मेहनत का जज्बा कभी दिल से मिटाना नहीं ........ - प्रियंका त्रिवेदी

जुदाई का लम्हा ................

जुदाई का पल  अक्सर एक लड़की लड़की के ही जीवन में आता है , हर बार उसे उसके माता - पिता से अलग कर दिया जाता है , जिसे  उसके माता - पिता इतने लाड - प्यार के साथ बड़े ही , नाजों से पलते - पोसते हैं , उसकी हर  ख्वाहिश को , उसकी हर चाहत को , और उसकी साड़ी छोटी - बड़ी इच्छाओं को पूरा करते हैं , उसको पढ़ाते हैं , लिखाते  हैं , उसे इस समाज में रहने के काबिल बनातें  हैं , उस पर अपना ढेर सारा प्यार लुटाते हैं , एक बेटी भी अपने माता - पिता से बहुत प्यार करती है , अपने घर से भी बहुत प्यार करती है , अपने परिवार को वो इतना चाहती है की वो उनके बिना कभी भी नहीं रह सकती ......... बचपन से लेकर कई सालों तक वो अपने घ्जर में अपने माता - पिता , अपने भाई - बहनों , के साथ रहती है , कहलती- कूदती है , कितना ढेर सारा वक्त बिताती है , जब वो अपने , भाई - बहनों के साथ खेल - खेल में लडती - झगडती  है  तो उसके मम्मी - पापा हमेशा उसे प्यार से या फिर डांटकर लड़ने से मना करते हैं , कभी - कभी वो डांट की वजह से नाराज  भी हो जाती है , लेकिन फिर थोड़ी देर के बाद वो फिर से वैसे...

गजल ............

दिल के जख्मों को जुबान पे लायें कैसे , गम - ए - उल्फत  का दीदार कराएँ कैसे  , अपने दुखों को  दुनिया से छुपायें कैसे , अपने ग़मों से सबको बचाएं कैसे, दिल के जख्मों को जुबान पे लायें कैसे ,!! दिल में उठते हुए तूफ़ान को मिटायें कैसे ....... उजड़े हुए चमन में बहार लायें कैसे  ......... अपनी डूबती हुई कसती को पार लगायें कैसे .... दिल के जख्मों को जुबान पे लायें कैसे , !!! दिल में उमड़ते हुए सैलाब को रुकाएं कैसे , अपने टूटे हुए मन को मनाएं कैसे ..... अपनी हस्ती को आफताब  बनाएं कैसे ?? दिल के जख्मों को जुबान पे लायें कैसे !!!! लायें कैसे ???? "प्रियंका त्रिवेदी "