Skip to main content

Posts

ऐसा क्यूँ होता है ?? ....................

  ऐसा क्यूँ होता है??  बगिया खिलने से  पहले ही फूल मुरझा जाते  हैं   दुनिया रौशन  होने से पहले ही अँधेरा हो जाता है , खुशियाँ आने से पहले ही गम छा जाता है  दिल जुड़ने से पहले ही टूट जाता है  अरे ज्यादा इमोशनल होने वाली बात नहीं है  सब महंगाई का असर है  :) :) हर इमोशन  टाइम टाइम पर चेंज होता रहता है  रिसेशन  का टाइम है यार तो इमोशन भी  महंगे हो  गये हैं  ............... "प्रियंका त्रिवेदी"

खुशियाँ ...........

  एह  खुदा बस तुझसे है इतनी सी इल्तजा के,  राह़े प्यार  में उसको खुशियाँ हज़ार देना , भूल जाए वो हमें , उसका मुक्कद्दर संवार देना, उसकी खिलती ज़िन्दगी से मेरा अक्स निकाल देना  एह  खुदा उसे खुशियाँ जिंदगी में हज़ार देना !!!!!!                                     - प्रियंका त्रिवेदी 

उमीदों का कारवां .............

उमीदों का कारवां है दुखों से भरा ....... राह है मुश्किल , मंजिल है काटों भरी ... मगर तू चलता जा राही , अपनी डगर  बिना मंजिल की फिकर  किये मुसाफिर तुझे अपना लक्ष्य जरुर हासिल होगा , एक ना एक दिन ..... उमीदों का कारवां है दुखों से भरा ....... तू चलता जा राही तू चलता जा ..... "  प्रियंका  त्रिवेदी "

आज क्या लिखूं ...............

क्या लिखूं मैं आज ????? आज मेरे शब्दों को ये क्या हो गया है .. शब्द मिट गये हैं , रास्ता खो गया है जो न सोचा था कभी ये वही हो गया है आज मेरे शब्दों को ये क्या हो गया है ..  नहीं  मिल रही  हैं शब्दों को आज उनकी मंजिल ,  विव्हल हैं  ये  शब्द आज ऐसे जैसे रो रहे हो  जाने पे किसी के ... कैसी लगी नज़र इनको ऐसी .. टूट कर बिखर गये हों जैसे ,,, आज मेरे शब्दों को ये क्या हो गया है .. मंजिलें भी नयी हैं रास्ता भी नया  है आज मेरे शब्दों को ये क्या हो गया है ..??????? ये क्या खो गया है ..... ये क्या खो गया है?????? "प्रियंका त्रिवेदी" POSTED ON 07-08-12 AT 11:37 P.M.

माँ ...............

" काँटों पर चलकर जिसने फूलों का आशियाना सजाया , शोलों पर चलकर जिसने हमें अंगारों की तपन से बचाया , खुद को भूलकर जिसने हमें जीना सिखाया , बारिश में भीगकर जिसने हमें , धूप से छिपाया , वो कौन है ?????? वो माँ है , माँ है .... हम सबकी दुलारी माँ हैं .................. "प्रियंका त्रिवेदी "

गहरे घाव ...

वक़्त के दिए गए घावों को मिटायें कैसे और इन्हें दुनिया से छुपायें कैसे - छुपायें कैसे !!!!!!!!!!!! - प्रियंका त्रिवेदी

जीवन का सार .......

ममता की छाव को कभी भुलाना नहीं चाहें कुछ भी हो जाये उन्हें कभी रुलाना नहीं .. पिता का विश्वास कभी तोडना नहीं उनका साथ कभी छोड़ना नहीं .. अपने गुरुजनों का दिल कभी दुखाना नहीं और उनका आशीर्वाद लेना कभी भुलाना नहीं . भगवन का नाम कभी मन से हटाना नहीं और मेहनत का जज्बा कभी दिल से मिटाना नहीं ........ - प्रियंका त्रिवेदी